आज भी वो मेरा इंतजार करती होगी

आज भी वो मेरा इंतजार करती होगी
अपनी शामें मेरी यादों की नज़र करती होगी

पाँव रस्ते पे पड़े सायों मे उलझते होंगे
अपनी आहट से डरते सहमे से सरकते होंगे
कच्ची धानी सी हवा नश्तर चुभाती होगी
उसको रह रह के मेरी याद सताती होगी

होंठ चुपके से मेरी आमद की दुआ करते होंगे
कांपते हाथ भी सिज़दे के लिए उठते होंगे
सूखी आँखें उन्हीं रस्तों पे भटकती होंगी
सोई हसरत कभी नींदों मे उचकती होगी

बिखरे पन्नों में मेरा ख़त कोई मिलता होगा
सूखते पेड़ पे नया पत्ता कोई खिलता होगा
फिर डूबती शाम उसे सुरमई लगती होगी
कैद मे बंद सज़ा ज़िंदगी लगती होगी

वक्त उसे देख ठहर जाता होगा
उसका मांजी उसे मिलने चला आता होगा

और फिर कितने ही लम्हे यों गुज़रते होंगे
कान चुपके से मेरी आहट को सुनते होंगे
होंठ सांसों की तपिश पा के पिघलते होंगे
हाथ हाथों की छुवन भर से सिहरते होंगे
जाने फिर कितने ही लम्हे यों गुज़रते होंगे

और जब आखिरी ख़त मेरा, हाथ मे आता होगा
मेरे वादे का ज़िक्र ज़हन मे लाता होगा
अश्क आंखों की सदा बन के बरसते होंगे
होंठ मुझसे वफा की शिकायत भी करते होंगे
टूटे सपने वहीं खिड़की मे सुलगते होंगे
दिल के टुकड़े भी वहाँ साथ ही जलते होंगे

मेरी तस्वीर से लिपट कर बहुत रोती होगी
रात को देर से बमुश्किल ही सोती होगी
हर सुबह फिर मेरे छूने से ही जगती होगी
आज भी वो मेरा इंतजार करती होगी ।।

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